Saturday, February 11, 2012

किसको पता है
कल के माथे
क्या लिखा है ?
कल की तरह
वो कल भी तो पोशीदा है
हम रहे ना रहे
ज़िन्दगी बस जाविदा है ।

कुछ नई दीवारें
एक नई छत
कुछ नई खिड़कीयाँ
उस साइज के नए परदे ।

साथ मे कुछ नए कपड़े
एक जोडी़ नई चप्पल
कुछ नए
कुछ पुराने यार-दोस्त ।

ज़िन्दगी की मियाद यहां बस ग्यारह महीने की
फिर एक नया पता
इस शहर में जब से आया हुँ
“स्थायी पता” के आगे जगह खाली छोड़ देता हुँ

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