याद करूँ बचपन को जब जब बेड़ी लगती पाँव में।
जो कुछ मैंने शहर में देखा वो दिखते हैं गाँव में।।
... घूँघट में सिमटी दुल्हन अब बीते दिन की बात है।
जीन्स पेंट, मोबाइल, टी०वी०, गाड़ी भी सौगात है।
मन की बातें, अपना सुख-दुख बतियाने का समय नहीं,
महिलायें भी काम पे जाती दिन है चाहे रात है।
समाधान सामाजिक अब न होता पीपल छाँव मे।
जो कुछ मैंने शहर में देखा वो दिखते हैं गाँव में।।
लोग सहजता से न मिलते बाजारों की भाषा है।
खुशी के बदले अब चेहरों पर छायी बहुत निराशा है।
विज्ञापन का सहन-सहन पर है प्रभाव बढ़ता जाता,
चाहत एक हुई पूरी तो दूजे की प्रत्याशा है।
चकित सुमन बदलाव देखकर रहा गाँव न ठाँव में।
जो कुछ मैंने शहर में देखा वो दिखते हैं गाँव में।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
'तेरा दर सबसे प्यारा'
-तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाओ मै!
-सुनता मेरी कौन है किसे सुनाऊ मै !!
-जब से याद भुलाई तेरी लाखो कष्ट उठाय!
-क्या जानूँ इस जीवन अन्दर कितने पाप कमाए!
... -हूँ शर्मिंदा आपसे क्या बतलाऊँ मै !!तेरे दर को --
-मेरे पाप कर्म ही तुझसे प्रीति न करने देते!
-कभी चाहूं मिलूँ आपसे रोक मुझे वह लेते!
-कैसे स्वामी आपके दर्शनपाऊँ मै!!तेरे दर को--
-है तू नाथ सबका दाता तुझसे ही सब वर पाते!
-ऋषि -मुनि और योगी सारे तेरे ही गुण गाते!
-छीटा दे दो ज्ञान का होश में आऊँ मै!तेरे दर को--
-जो बीती सो बीती लेकिन बाकि उम्र संभालूं !
-चरणों में बैठ आपके गीत प्रेम के गालूँ!
-जीवन भगवन अपना सफल बनाऊं मै!!
-तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाऊं मै !
उठ जाग मुसाफिर भोर भई ,
अब रैन कहां जो सोवत है
जो जागत है वो पावत है,
उठ नींद से अखियाँ खोल ज़रा ,
और अपने प्रभु से ध्यान लगा,
... यह प्रीत कारन के रीत नहीं,
प्रभु जागत है तू सोवत है ,
जो आज करना है अब कर ले
जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया
फिर पछताए क्या होवत है .
=====
" कैसे अजीब लोग बसते है ,
तेरे शहर में ऐ खुदा ........
शौक ऐ दोस्ती भी रखते है ,
और याद भी नहीं करते "
======
जो कुछ मैंने शहर में देखा वो दिखते हैं गाँव में।।
... घूँघट में सिमटी दुल्हन अब बीते दिन की बात है।
जीन्स पेंट, मोबाइल, टी०वी०, गाड़ी भी सौगात है।
मन की बातें, अपना सुख-दुख बतियाने का समय नहीं,
महिलायें भी काम पे जाती दिन है चाहे रात है।
समाधान सामाजिक अब न होता पीपल छाँव मे।
जो कुछ मैंने शहर में देखा वो दिखते हैं गाँव में।।
लोग सहजता से न मिलते बाजारों की भाषा है।
खुशी के बदले अब चेहरों पर छायी बहुत निराशा है।
विज्ञापन का सहन-सहन पर है प्रभाव बढ़ता जाता,
चाहत एक हुई पूरी तो दूजे की प्रत्याशा है।
चकित सुमन बदलाव देखकर रहा गाँव न ठाँव में।
जो कुछ मैंने शहर में देखा वो दिखते हैं गाँव में।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
'तेरा दर सबसे प्यारा'
-तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाओ मै!
-सुनता मेरी कौन है किसे सुनाऊ मै !!
-जब से याद भुलाई तेरी लाखो कष्ट उठाय!
-क्या जानूँ इस जीवन अन्दर कितने पाप कमाए!
... -हूँ शर्मिंदा आपसे क्या बतलाऊँ मै !!तेरे दर को --
-मेरे पाप कर्म ही तुझसे प्रीति न करने देते!
-कभी चाहूं मिलूँ आपसे रोक मुझे वह लेते!
-कैसे स्वामी आपके दर्शनपाऊँ मै!!तेरे दर को--
-है तू नाथ सबका दाता तुझसे ही सब वर पाते!
-ऋषि -मुनि और योगी सारे तेरे ही गुण गाते!
-छीटा दे दो ज्ञान का होश में आऊँ मै!तेरे दर को--
-जो बीती सो बीती लेकिन बाकि उम्र संभालूं !
-चरणों में बैठ आपके गीत प्रेम के गालूँ!
-जीवन भगवन अपना सफल बनाऊं मै!!
-तेरे दर को छोड़ कर किस दर जाऊं मै !
उठ जाग मुसाफिर भोर भई ,
अब रैन कहां जो सोवत है
जो जागत है वो पावत है,
उठ नींद से अखियाँ खोल ज़रा ,
और अपने प्रभु से ध्यान लगा,
... यह प्रीत कारन के रीत नहीं,
प्रभु जागत है तू सोवत है ,
जो आज करना है अब कर ले
जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया
फिर पछताए क्या होवत है .
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" कैसे अजीब लोग बसते है ,
तेरे शहर में ऐ खुदा ........
शौक ऐ दोस्ती भी रखते है ,
और याद भी नहीं करते "
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