सभी के साथ चलते हैं...
सभी के साथ चलते हैं सभी की बात कहते हैं
नहीं अज्ञात से मतलब हमेशा ज्ञात कहते हैं
सरलता से भरा जीवन सहजता से भरी वाणीं,
सरसता बाँटते फिर भी नहीं हम नात कहते हैं
विदित इतिहास भी कुछ है समझना चाहते कल को,
मगर इस दौर के जो हैं वही हालात कहते हैं
कलम के कर्म को जाना कलम का मर्म पहचाना,
सहे हैं सैकड़ों शर पर नहीं आघात कहते हैं
सतत संघर्ष के कारण सजी सँवरी दिखे दुनिया,
जिन्हें आता महज रोना उन्हें नवजात कहते हैं
विप्र ने तो किसी को भी कभी बैरी नहीं माना,
ह्रदय से जो उमड़ती वो सरस बरसात कहते हैं

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