अपना पराया
---------- हमारी भलाई चाहने वाला पराया भी हो, तो भी वह अपना हो जाता है जब कि हानि करने वाला अपना भी अपना नहीं होता बल्कि शत्रु होता है !
देखिये न ! रोग और विकार आखिर तो अपने शरीर में ही पैदा होते है और शरीर को कष्ट देते है !
जबकि दूर जंगल में पैदा हुई जड़ी- बूटी शरीर के कष्ट मिटाती है और प्राण रक्षा करती है !!

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