Friday, January 4, 2013

किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ..................!!!

किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ ..............
यूँ ही पलट जाये मेरी जिंदगी, तो क्या बात है !!
ख्वाबोँ में रोज मिलता हूँ जिनसे ,

हकीकत में आये, तो क्या बात है !!
कुछ मतलब के लिए ढूंढते है लोग मुझे ,

बिना मतलब जो मिले, तो क्या बात है !!
कत्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा ,
कोई बातों से ले जाये, तो क्या बात है !!
जो शरीफों कि शराफत में बात न हो,

इक शराबी कह जाये तो क्या बात है !!
अपने रहने तक खुशी दूँगा सब को ,

जो किसी को मेरी मौत से मिल जाये, तो क्या बात है !!
किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ..................!!!

4 Comments:

At February 3, 2017 at 8:05 AM , Blogger Unknown said...

Wah BAHUT khoob

 
At March 9, 2017 at 10:04 PM , Blogger V.D.Pandey said...

शुक्रिया बंधु

 
At April 8, 2019 at 1:08 AM , Blogger ĞðÞãľ Ŝĥãřmå said...

kya baat hai

 
At June 4, 2020 at 3:48 AM , Blogger Unknown said...

Wah sir.. aapne kb likhi ye kavita

 

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