किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ..................!!!
किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ ..............
यूँ ही पलट जाये मेरी जिंदगी, तो क्या बात है !!
ख्वाबोँ में रोज मिलता हूँ जिनसे ,
हकीकत में आये, तो क्या बात है !!
कुछ मतलब के लिए ढूंढते है लोग मुझे ,
बिना मतलब जो मिले, तो क्या बात है !!
कत्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा ,
कोई बातों से ले जाये, तो क्या बात है !!
जो शरीफों कि शराफत में बात न हो,
इक शराबी कह जाये तो क्या बात है !!
अपने रहने तक खुशी दूँगा सब को ,
जो किसी को मेरी मौत से मिल जाये, तो क्या बात है !!
किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ..................!!!
यूँ ही पलट जाये मेरी जिंदगी, तो क्या बात है !!
ख्वाबोँ में रोज मिलता हूँ जिनसे ,
हकीकत में आये, तो क्या बात है !!
कुछ मतलब के लिए ढूंढते है लोग मुझे ,
बिना मतलब जो मिले, तो क्या बात है !!
कत्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा ,
कोई बातों से ले जाये, तो क्या बात है !!
जो शरीफों कि शराफत में बात न हो,
इक शराबी कह जाये तो क्या बात है !!
अपने रहने तक खुशी दूँगा सब को ,
जो किसी को मेरी मौत से मिल जाये, तो क्या बात है !!
किताबों के पन्ने पलट कर सोचता हूँ..................!!!

4 Comments:
Wah BAHUT khoob
शुक्रिया बंधु
kya baat hai
Wah sir.. aapne kb likhi ye kavita
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