Tuesday, January 15, 2013

बलात्कार की घटनाओं के लिए अकेले पुरुष ही जिम्मेदार नहीं हैं, इसमें स्त्री की भी भूमिका है। वह अपनी पोशाक, मेकअप, चालढाल, व्यवहार आदि से पुरुष को उत्तेजित क्यों करती रहती है? जो स्त्रियां अपने चाल-चलन में शील और संयम का परिचय देने में खुद असमर्थ हैं, उन्हें यह शिकायत करने का नैतिक अधिकार नहीं है कि पुरुष ने खुद पर नियंत्रण खो कर अनैतिक कार्य किया है। कानून की निगाह में, अपराधी ही नहीं, उसे अपराध करने के लिए उकसाने वाला भी सजा का हकदार होता है।

बलात्कार या बलात्कार की धमकी सिर्फ एक कामुक क्रिया नहीं है, यह स्त्री को उसकी परंपरागत और संकीर्ण दुनिया में वापस धकेलने की सुचिंतित रणनीति है। हर छेड़छाड़ या बलात्कार ऊंची आवाज में की गई मुनादी है: खबरदार, बाहर निकली, तो तुम्हारे साथ यही होगा। फैशन करोगी, तब भी तुम्हारे साथ यही होगा। गैर-मर्दों के साथ घूमोगी-फिरोगी, देर रात तक उनके साथ रहोगी, खुलेआम शराब या हुक्का पियोगी तब तो तुम्हारे साथ यह होगा ही। इस चेतावनी में स्त्री के लिए कहीं प्रच्छन्न संकेत यह भी है कि जब तुमने सारी आजादियों का लुत्फ उठाने का फैसला कर लिया है, तो तुम्हें पुरुष (यानी उसकी वासना) के प्रति भी उदारता से पेश आना चाहिए। मर्दों की दुनिया में जीना है, तो मर्दों को नाराज रख कर कितनी दूर जा सकती हो, बेबी? आधुनिक या उत्तर-आधुनिक जीवन शैली और परंपरागत जीवन मूल्य, ये दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते।

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