.....उम्र पूरी हो गई
यह सोचते ही सोचते सब उम्र पूरी हो गई।
इंसान की मुस्कान क्यों आधी-अधूरी हो गई।।
देखिए हर भाल पर चिन्ता की रेखा खिंच रहीं।
नफरत के उपवन सिंच रहे और नागफनियॉं खिल रहीं।।
इंसान से इंसान की अब क्यों है दूरी हो गई।
यह सोचते ही सोचते ................................।।
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