गरीबी, मंहगाई, भ्रष्टाचार. अत्याचार और देश की तरक्की
कभी नहीं समझोगे ग़रीबों की ब्यथा और कमरतोड मंहगाई की मार
जो रत है भ्रष्टाचार में और जन आवाज़ उठानेवालो पर करते अत्याचार ,
बनावटी आकडों से मंहगाई और भ्रष्टाचार कभी कम हो नहीं सकता
जहाँ होती आत्महत्याये, बच्चे तरसे दूध को, जब चूल्हा मुश्किल से जलता
और सरकार मुह ताके विदेशी निवेश का, वह देश कभी तरक्की कर नही सकता

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