Tuesday, October 25, 2011

रखती अजब दिमाग नदी

पर्वत  से  ही  निकल  रही  है ,
सरस  नीर  की  धार  नदी .
पशु -पक्षियों , पेड़  मानव  से ,
करती  सच्चा  प्यार  नदी .
कल -कल  छल -छल  करती  रहती ,
छेड़े  मीठा  राग  नदी .
रखती  अजब  दिमाग  नदी

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