रखती अजब दिमाग नदी
पर्वत से ही निकल रही है ,
सरस नीर की धार नदी .
पशु -पक्षियों , पेड़ मानव से ,
करती सच्चा प्यार नदी .
कल -कल छल -छल करती रहती ,
छेड़े मीठा राग नदी .
रखती अजब दिमाग नदी
सरस नीर की धार नदी .
पशु -पक्षियों , पेड़ मानव से ,
करती सच्चा प्यार नदी .
कल -कल छल -छल करती रहती ,
छेड़े मीठा राग नदी .
रखती अजब दिमाग नदी

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