तूफानों की ओर घुमा दो
सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
इसके ही बल पर कर डाले
सातों सागर पार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।।
लोग करते हैं कोशिश जितनी मुझे रुलाने की,
मुझे मिलती है ताकत और मुस्कुराने की.....!
वो समझते हैं की मैं टूट के बिखर जाऊँगा,
मुझे यकीन हैं मैं और निखर आऊँगा........!!
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
इसके ही बल पर कर डाले
सातों सागर पार
तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।।
लोग करते हैं कोशिश जितनी मुझे रुलाने की,
मुझे मिलती है ताकत और मुस्कुराने की.....!
वो समझते हैं की मैं टूट के बिखर जाऊँगा,
मुझे यकीन हैं मैं और निखर आऊँगा........!!


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